मंगलवार, 31 मई 2011

सोचता हू अब ,देखता था तब......

सोचता हू अब ,
देखता था तब......

वो दुनिया जिसमे आज से रंग  कम थे,
अंधेरो और उजालोँ के अपने ढंग थे,
न कोई बनावट न थी कोई उलझन 
सच तो ये है की तब दोस्त भी कम थे.....

उस दुनिया में नाजुक सा ख्वाब था बुना,
नंगे पैरो से उर्न्ने  कि राह था चुना,
अल्हर जवानी करीब आ रही थी
जेब खाली थी पर जिंदगी मुस्कुरा रही थी....

असीम चाह थी अनंत सोच थी,
सागर में मोती की ख़ोज थी,
कहीं तराने कहीं चीख थी
हर पल में मिलती नयी सीख थी .......

तरप तब भी थी पर उलझन नही थी,
नींद ज्यादा थी पर इतनी सिलवट नहीं थी,
उस दुनिया के अपने अलग ही थे तेवर
रुकती थी लेकिन सरकती नहीं थी.........







रविवार, 29 मई 2011

कुछ दिन और.....

कुल मिलकर १८ दिन और बचे हैं.अब मुंबई जाना है. जब मई बंगाल में आया था तब से लेकर अब तक बंगाल और भारतीय राजनीति में काफी बदलाव आये हैं.
जब मई बंगाल में आया था तब लेफ्ट की सरकार थी. अब ममता बेनर्जी की गवर्मेंट है. अपने आप में ये इतिहास है. टाटा के नैनो प्लांट से लेकर गरीबो की हार बात को उठाने वाली ममता ने अपने राजनीतिक कद को अब तक का सबसे ऊँचा मुकाम दिया है.
लोकपाल बिल के लिए सरकार ने कमेटी बनाकर मामला ठंडा कर दिया है. अब रामदेव जी आगे आये हैं. भ्रस्टाचार के बजे ये काले धन की बात कर रहे हैं. ४ जून से अनशन पे होँगे.....देखते हैं आगे क्या होता है.
करूणानिधि की हालत काफी ख़राब है. बेटी जेल में है, चुनाव हार चुके हैं. ..... कम से कम ५ साल की तो छुट्टी है. सुरेश कलमानी भी जेल में है अ रजा के साथ.
उत्तर प्रदेश में किसानो के संघर्ष को लेकर राहुल बनाम मायावती की बयानबाजी अपने शुरूर पे है.भूमि अधिग्रहण बिल लाने  का वादा राहुल कर चुके हैं लेकिन ये तो वक़्त ही बताएगा की इसमें कितना दम है.
मनमोहन जी दक्षिण अफ्रीका की यात्रा से अभी वापस आये हैं. सारा मामला चीन से शुरू हुआ और अहीं पे ही ख़त्म हो गया.  सारी कूटनीति चीन को ध्यान में रखकर बनायीं जा रही है.
कांग्रेश के १२५ साल पूरे होने पर प्रणव मुखर्जी १ किताब निकाले हैं जिसमे इंदिरा गाँधी को गलत बताया गया है. ये किताब कुछ इतिहासकारो और संपादको ने लिखी है इसलिए कांग्रेस इसे लेखको के निजी विचार मान रही है.