बुला रहे हैं गैर अब
अपने भुला रहे हैं
जगा रहीं है नींदे
सपने सुला रहे हैं
उजालों का हांल ये है
कि भूल गया चेहरा
अँधेरे ने भेज दिए हैं जुगनू
सन्नाटे बुला रहे हैं
कह रहा है वक़्त कि
बस पीछे मुड़ कर देख लो
जितनी भी ख्वाहिशें थीं
दिल में आज समेट लो
बस यहीं से चल पड़ो
दूर कहीं उड़ चलो
रास्तों की फ़िक्र छोडो
उस घाट तक पहुँच चलो
उम्मीद वाले घर में
सपनों के उस नगर में
कोई रस्ता देख रहा है
चेहरा लिये नयन में
अंतस का अम्बर छूना
जी भर के सांस लेना
दामन में सर को रख के
दुनिया समेट लेना
बस ! हर एक कदम में अपने
अब जी भर के जान रखना
देखो ! देख रहा है कोई
उसको उदास मत करना