रविवार, 26 जून 2011

शहर नया है , दिल कहता है कुछ नया करो...

मुंबई................ 
जैसे और कुछ कहने की जरूरत ही नहीं है. बहुत कुछ अपने आप दिमाग में घुमने सा लगता था.पर आज मै घूम रहा हु. यकीनन कुछ खास तो है ही एस शहर में.
आज पहली  बार बाहर निकला. वही समुन्दर , वही मौजे दरिया, वही इठलाती लहरें जैसे ये बता  रहीं हों की ये दुनिया कितनी ही क्यूँ न बदल  जाय.... उन्हें गुरूर तब भी था , आज भी है और कल भी  रहेगा.
यहाँ के पर्वतों  की क्या बात करूँ...ऑफिस तो पर्वतों में ही बना  है.ऊपर से उनकी हरियाली चार चाँद लगा देती है.  हवा को नचाना तो कोई   इन  पर्वतों से सीखे. हवा का सारा गुरूर पलट जाता है इन  पर्वतों के सामने. बिलकुल उसी तरह जैसे किस्मत के आगे इंसान घुटने टेक देता है.
मनीष ५ साल  पहले मेरे साथ था. जिन्दगी जीना इसी साल सीखा था.  हमने कोचिंग साथ की थी. आज उसके साथ मुंबई में वक़्त बिताना कितना मजेदार लग रहा है , ये मै ही समझ सकता हु. खैर, किस्मत कहा ले जाती है, वक़्त भी समय से पहले नही जान पाता. आखिर में............Missing Lucknow