रविवार, 21 अक्टूबर 2012

युवाओं के एक विशाल वर्ग को मुहब्बत का ख्वाब दिखने दिखने वाला शख्स अब नही रहा . हम जब भी करियर की बात करते हैं तो इंग्लिश में करते हैं , जब पारिवारिक बात होती है तो हिंदी में बात करते हैं , लेकिन जब मुहब्बत और रोमांस की बात करते है तो वो भाषा यश चोपरा की भाषा में बात करते हैं।
 ये मेरी खुशकिस्मती है की 7 जनवरी 2012 को मुंबई में  मैंने दर्शन किया था . चकाचौंध के बीच यश का अपना  अलग ही अंदाज था ..... ऊपर वाला उन्हें जन्नत ही अता करेगा .

सोमवार, 1 अक्टूबर 2012

पूरे वर्ष का सबसे महान दिन है -2 अक्टूबर .
एक ऐसे भारतीय संत की याद  दिलाता है, जिसके बताये रस्ते पे चल कर अमेरिका का राष्ट्रपति नोबेल प्राइज पाता है।
दूसरी तरफ एक फ़कीर के घर पैदा होने वाला  भारत का यशस्वी प्रधानमंत्री जिसने हर कठिनाई को सत्य और त्याग के बल से परास्त किया।  देश को ऊर्जा का श्रोत दिया-जय जवान ,जय किसान।
इस उम्मीद के साथ की 2 अक्टूबर 2012 को इतिहास याद करेगा ...शत शत नमन।

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