कश्ती को यूँ रोक के, समंदर को मत गुमराह कर
या तो समेट लो खुद को या उस पार तक विस्तार कर
खौफ़ हो , तन्हाई हो , सितम हो या लाचारी
सब बिना सरहद के है , तू बस नक्शा तैयार कर
या तो समेट लो खुद को या उस पार तक विस्तार कर
खौफ़ हो , तन्हाई हो , सितम हो या लाचारी
सब बिना सरहद के है , तू बस नक्शा तैयार कर