शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

हर सपने का आधार रहे हो,
पल पल मेरे साथ रहे हो
जीवन दर्शन गणित आराधना
हर नैया के  खेवनहार रहे हो.... ...

सूखी फसलों के ख्वाब के जैसे
जीवन की हरियाली हो
मन के घोर  अंधेरों की आशा
बिना दीप दीवाली हो


हर जीत के नश्वर जग में
चाँद सितारों तक समझाया
प्यार मोह की अनुभूति कराकर
मुझको मुझसे है मिलवाया


झूठी दुनिया के एस किस्से को
मई स्वीकार करूँ कैसे?
इतना सारा कर्ज है तेरा
मई व्यापार करूं कैसे??..............विनीत 

रविवार, 5 फ़रवरी 2012

सरहद 
इंसानों के लिए है,

सोचो.........
तुमने और मैंने
क्या पाया 
इंसा हो के..????

पंछी ..... नदिया.......पवन के झोंके..!!!