मंगलवार, 29 जनवरी 2013

महात्मा गाँधी के दर्शन का आधार " सत्य  पर  विश्वास " था। चंपारण से लेकर राजघाट तक के भारतीय  राजनीतिक जीवन में ऐसे कई मौके आये जब बापू  को जानबूझकर चुप रहना पड़ा। अपमानित भी होना पड़ा। चाहे सुभाष चन्द्र बोस हों या  जिन्ना, बापू ने कभी भी गलत को सही नही कहा।
उसी विश्वास को आज विश्व नमन कर रहा है।
कोटि कोटि नमन !!!

मंगलवार, 1 जनवरी 2013


वक़्त का आखिर तारीखों से रिश्ता क्या है
सदियों पहले
जब इंसान ने वक्त को कैद करना चाहा  होगा
तो उसने तारीखें बनायीं होंगी
ये देखकर
वक़्त मुस्कुराया होगा
उसने  देखा कि अब इंसान उसका हिसाब रखना शुरू करेगा
लेकिन वक्त तो वक्त ठहरा
उसे तो  आवारगी की आदत पड़ चुकी थी
ये सोचकर कि इंसान को 
शायद कभी अक्ल आ जाय
वक्त आज भी अपने अंदाज में
शायरों के ख्याल सा
हर रोज दुनिया के हजारों चक्कर लगाता रहता है
और इंसान तारीखों में ही
खोकर खुश है .............विनीत












तेरे बन्दों ने भी क्या क्या किया है  तमाशा मौला
अंकों का हेर फेर और फासला है  सदियों का -


वक़्त से बड़ा आवारा कोई और कहाँ


हर घड़ी का हिसाब रखना पड़ता है आज कल
वक़्त का आखिर तारीखों से रिश्ता क्या है










समंदर की है आरजू

रास्ता है नदियों का