रविवार, 30 सितंबर 2012

जिसे न महसूस किया जा सकता ,
 न समझा जा सकता ,

जो  न सच है , न झूठ है

जन्मों से साथ चली आ रही है

परछाई  की तरह 

दर्शन की माया है

जीवन का प्यार है

प्रकृति की सुन्दरता है

और

रात का ख्वाब है।

सच को बिना बोले, बिना सुने, बिना समझे भी महसूस किया जा सकता है।
झूठ को मह्सूस नही किया जा सकता। सुना और बोला जा सकता है। समझा जा सकता है।

मंगलवार, 25 सितंबर 2012

 अभी हौसला बहुत है कि खुद को समझा लेंगें

 फिर भी नही सम्भले , तो संभल जायेंगे तेरा हल देखकर  

शनिवार, 22 सितंबर 2012

वक़्त सबको बदल देता है। आज उसे देखकर यकीन ही नही हो रहा था की ये वही है।
फिर तो वक़्त ने मुझे भी बदला होगा। 
काश,
हम इंसान समझ पाते उसकी दुनिया को।
 

गुरुवार, 20 सितंबर 2012

ये लहरें, ये हवाएं , ये चांदनी 

जिसके हिस्से में ये जवानी है   

ये मुहब्बत उसकी इबादत है 

हर एक शय में जिसकी मेहरबानी  है 



मंगलवार, 18 सितंबर 2012

कल रात ज़िन्दगी से भी रहा नहीं गया 
अलग होके मुझसे लगी सवाल करने 
पूछा , इस कदर टूट कर 
कब तक चाहोगे उसे ?
कहा  मैंने भी
कि  बता मुझको 
सिवा चाहत के और क्या 
सिखाया है मुझे तुमने 

कहा उसने की आखिर ऐसा खास क्या उसमें 
इतने बड़े जहां में है वो आम सी लड़की ?
कहा मैंने  कि , बस एक पल के लिए 
मेरी आँखों से उसको देख लो तुम 
दुबारा तुम ना  पूछोगी 
कि इतनी दीवानगी क्यूँ है 

ये रास्ता है तबाही का 
मै कब तक साथ दूँ तेरा 


















 




कहा , मुहब्बत मोम का घर है 






























मत कर तबाह मुझको 
किसी गैर के लिये ...

सोमवार, 17 सितंबर 2012

कभी रस्ते में मिल जाओ
तो कतरा के गुजर जाना 
हमें इस तरह तकना 
जैसे पहचाना नही तुमने 

हमारा जिक्र जब आये 
तो यूँ अनजान बन जाना 
कि जैसे नाम सुनकर भी 
हमें जाना नहीं तुमने ......
कल नयी कोंपलें फूटेंगी,
कल नये फूल मुस्काएयेंगें,
और नई घास के नये फर्श पर
नये पांव इठलायेंगें ......

वो मेरे बीच नहीं आये
मै  उनके बीच में क्यूँ आऊं
उनकी सुबह और शामों का
मै एक भी लम्हा क्यूँ पाऊं

मै पल दो पल का शायर हूँ,
पल दो पल मेरी कहानी है
पल दो पल मेरी हस्ती है
पल दो पल मेरी कहानी है ...........

  

मंगलवार, 4 सितंबर 2012

शिक्षक दिवस पे उन सभी जाने अनजाने गुरुओं का आभार जिनसे जीवन में विविध रंग देखने को मिला। इस सूची में स्कूल,कॉलेज के शिक्षक , मित्र, मार्गदर्शक , शुभचिंतक, आलोचक से लेकर विपदा , मुहब्बत और तमाम परिस्थितियों का विनम्र आभार जिनसे हंसाने , रोने और मुस्कुराने का आत्म-बल मिला। ~विनीत