रविवार, 29 जनवरी 2012



बड़े अरमान से सज संवर के घर से निकले होंगे,

मुझे पता है उस महफ़िल में तेरे ही जलवे होंगे....

औरों के संग तुम झूमोगे- गाओगे भी 

मगर तुम्हारे अन्दर ही खुद से  कुछ शिकवे भी होंगे..

शनिवार, 28 जनवरी 2012

कोई अपने घर में है, कोई जाग रहा है रातों में...

चुप सा घर की बातें सुनता, कोई चीख रहा सन्नाटों में..

उसकी बोली सुनने की 
आदत जब चिल्लाती है..
कहीं रूठ न जाये वो 
मोबाईल हाथों से गिर जाती है..

उसकी करवट, उसकी नीदें 
उसके सपने बाहों में...
कोई चुप सा घर में है
कोई चीख रहा सन्नाटों में....

जिसकी बस एक आहट से
दिल में लहरें तूफानी हों..
रेत,समंदर, पुरवाई हो
धड़कन जिसकी दीवानी हो ..

हो बसंती मन का मौसम ,  दीप जले जज्बातों में,

कोई अपने घर में है, कोई जाग रहा है रातों में....... "विनीत" 

रविवार, 1 जनवरी 2012

"कैसा रहेगा ये साल , मुझे मालूम नहीं लेकिन,
पहले दिन ने ही है झकझोरा जमकर...
वो आवाज जिससे साल की शुरुआत हुई
गूंजेगी जिन्दगी भर हमसफ़र बनकर....!!!