सोमवार, 22 अप्रैल 2013

आज सुबह जब नींद खुली तो कमरे का सन्नाटा कुछ कह रहा था . ये सन्नाटा बेवजह नही चिल्ला रहा था .  मेरे साथ रहने वाला सौम्य दिल्ली छोड़कर इलाहाबाद जा चुका था . जहन तक मई उसे समझ पाया, वो इंजीनियरिंग कभी नहीं करना चाहता था . मगर जिन्दगीं न सिर्फ  B.tech. करवा चुकी थी बल्कि M.tech. भी करवा रही थी . मगर  एक आग थी उसके अन्दर . मेरा यकीन है की ये आग उसे ऐसे मुकाम पे पहुंचाएगी जहाँ वो जाना चाहता है.  सृजन का प्रेमी है . और हाँ , वो गलियां बहुत  देता है .... सिर्फ इसलिए की वो कभी रोता नहीं . कुछ दिन पहले एक छोटी सी बिल्ली के प्रति उसका जो प्रकृति-प्रेम देखा , उससे तो यही लग रहा था की आज की दुनिया में उस जैसे लोगों की बहुत जरुरत है. एक आदर्श मित्र और रूम-मेट  की तरह वो मेरे यादों की दुनिया में हमेशा आबाद रहेगा . आखिर में उसके लिए यही कहूँगा कि  ....


ख़ुदा के हुक्म से शैतान भी है आदम भी
वो अपना काम करेगा तुम अपना काम करो .

शेष जीवन की अशेष शुभकामनायें .
मई मैं 

गुरुवार, 18 अप्रैल 2013

आज सुबह से
दिल कह रहा है
फिर पास बैठूं
सांसों के शोर में
झूठे बहाने सुनूँ
और
मुस्कुराते हुए
ये सोचूं
कि
तुम इतनी अच्छी क्यों लगती हो

वक़्त की शिफारिश पे
एक नई राह संवारी है
बहुत  अलग है ये दुनिया  फिर भी
तलाश तेरी, अब भी जारी है 
जब तक है खौफ़ मरने का ,

जिंदा नहीं हो तुम    

सोमवार, 8 अप्रैल 2013

गुजरे हैं  " इसी "  मुकाम से

गिरते परते कई  बुजुर्ग

हम लोग भी अब
परेशान
उसी सिलसिले में हैं 

गुरुवार, 4 अप्रैल 2013

वक़्त के साथ हसरतों ने करवट बदली है ... और इस  हादसे में एक मासूम बच्चा बच तो गया पर शायद जिंदा नही है अब ... 
रतजगे की आदत ने उससे सुबह की उम्मीद के बदले ,  घड़ी को घूरना सिख दिया है 
शाम की खिलखिलाहट अब टीवी और लैपटॉप के स्क्रीन में तलाशी जा रही है .... लेकिन ये सब ज्यादा दिन नही चलेगा .... 
इससे पहले की सपनों की लालच देकर नींद अपने आगोश में ले, बच्चे को फिर खिलौनों के लिए जिद करना होगा ... फिर से ए ...बी ...सी ... डी  सीखनी होगी  
अरे ये क्या ! बच्चा तो उठ के बैठ गया 
इस उम्मीद में की अगली सुबह फिर से उम्मीदें लेकर आएगी ......शुभ रात्रि