गुरुवार, 8 दिसंबर 2011

यूँ तो गुजरा है बहुत सा वक़्त लेकिन

समझ नही आता की बदला क्या है.......

ये प्यार का सवाल है या उसका ख्याल है

न वो बदले न हम बदले, तो फिर बदला क्या है.......


वही इशारा जुल्फों का
वही शरारत आँखों की,

वही ताजगी चेहरे की
इधर बेकरारी सांसो की

बे वजह नशा सा उमड़ता क्यों है....
मई तो चुप हु फिर अन्दर ये बोलता कौन है....





शुक्रवार, 2 दिसंबर 2011

गहरी रात के सन्नाटे में
कोई सूफी संगीत की आहट की तरह
दस्तक देता कोई हवा का झोंका
बिलकुल तुम्हारी तरह, 
ऐसा लगता है की तुम्हें छू कर आ रहा हो......



दिल  कुछ भारी हो जाता है
आँखें अनजाने में गीली हो जाती हैं
चाहत की कशिस तरपने लगती है
इस उम्मीद में कि
कोई इस जहाँ में है
जिसके  सासों कि डोर  
एक अनजाने आकर्षण से 
बरबस ही
एहसास कराती है
किसी ऐसी दुनिया के होने की
जहाँ सासों का हिसाब होता है.......

मेरी आँखों ने देखा है जिसे 
मेरी दुनिया वही से उगती है 
जब तेरी आँखे याद आती हैं 
दुनिया झूठी लगने लगती है
एस झूठी दुनिया के बहकावे में
खुद को लुटा देने से कहीं बेहतर है
डूबा रहूँ तेरी जुल्फों की घटाओं में
एस इंतजार में कि
शायद अब नींद आ जाय.....