एक झलक
एक झलक
और
स्थिर पलक
हलचल सी भीतर
आखिर क्योंकर ?
एक सफ़र
एक सफ़र
भीतर ही भीतर
किस मंजिल तक
आखिर कब तक ?
एक अफ़साना
एक अफ़साना
बिलकुल अनजाना
जिससे मैं हूँ
है क्यों छुपकर ?
एक सपना
एक सपना
है रहा बदलता
हर दिन हर पल
मुझे बदल कर
हर दिन हर पल
मुझे बदल कर ....... विनीत
एक झलक
और
स्थिर पलक
हलचल सी भीतर
आखिर क्योंकर ?
एक सफ़र
एक सफ़र
भीतर ही भीतर
किस मंजिल तक
आखिर कब तक ?
एक अफ़साना
एक अफ़साना
बिलकुल अनजाना
जिससे मैं हूँ
है क्यों छुपकर ?
एक सपना
एक सपना
है रहा बदलता
हर दिन हर पल
मुझे बदल कर
हर दिन हर पल
मुझे बदल कर ....... विनीत