मंगलवार, 13 नवंबर 2012


छुप के सीने में कोई जैसे सदा देता है 
शाम से पहले ही दिया दिल का जला देता है 
है उसी की ये सदा 
है उसी की ये अदा 
कहीं वो , 
ये तो नहीं .....

कैफ़ी साहब याद  आ रहे हैं .

शुक्रवार, 9 नवंबर 2012

शराब  इस लिये मैं फिलहाल  नहीं पीता

क्योंकि नाप तौल के पीना मुझे पसंद नहीं 

तेरे वजूद से अँगडाइ  ले के निकले 

वो मयकदा अभी बोतलों में बंद नहीं .....!!!  

सोमवार, 5 नवंबर 2012

din ki sari garmee shaam hote hi pighl jati hai

rat taaron ko khwabon me badal deti hai

sare mausam ek pal me palat jaate hain

hajar jhooth bolegi, fir hans deti hai

रविवार, 21 अक्टूबर 2012

युवाओं के एक विशाल वर्ग को मुहब्बत का ख्वाब दिखने दिखने वाला शख्स अब नही रहा . हम जब भी करियर की बात करते हैं तो इंग्लिश में करते हैं , जब पारिवारिक बात होती है तो हिंदी में बात करते हैं , लेकिन जब मुहब्बत और रोमांस की बात करते है तो वो भाषा यश चोपरा की भाषा में बात करते हैं।
 ये मेरी खुशकिस्मती है की 7 जनवरी 2012 को मुंबई में  मैंने दर्शन किया था . चकाचौंध के बीच यश का अपना  अलग ही अंदाज था ..... ऊपर वाला उन्हें जन्नत ही अता करेगा .

सोमवार, 1 अक्टूबर 2012

पूरे वर्ष का सबसे महान दिन है -2 अक्टूबर .
एक ऐसे भारतीय संत की याद  दिलाता है, जिसके बताये रस्ते पे चल कर अमेरिका का राष्ट्रपति नोबेल प्राइज पाता है।
दूसरी तरफ एक फ़कीर के घर पैदा होने वाला  भारत का यशस्वी प्रधानमंत्री जिसने हर कठिनाई को सत्य और त्याग के बल से परास्त किया।  देश को ऊर्जा का श्रोत दिया-जय जवान ,जय किसान।
इस उम्मीद के साथ की 2 अक्टूबर 2012 को इतिहास याद करेगा ...शत शत नमन।

 .

रविवार, 30 सितंबर 2012

जिसे न महसूस किया जा सकता ,
 न समझा जा सकता ,

जो  न सच है , न झूठ है

जन्मों से साथ चली आ रही है

परछाई  की तरह 

दर्शन की माया है

जीवन का प्यार है

प्रकृति की सुन्दरता है

और

रात का ख्वाब है।

सच को बिना बोले, बिना सुने, बिना समझे भी महसूस किया जा सकता है।
झूठ को मह्सूस नही किया जा सकता। सुना और बोला जा सकता है। समझा जा सकता है।

मंगलवार, 25 सितंबर 2012

 अभी हौसला बहुत है कि खुद को समझा लेंगें

 फिर भी नही सम्भले , तो संभल जायेंगे तेरा हल देखकर  

शनिवार, 22 सितंबर 2012

वक़्त सबको बदल देता है। आज उसे देखकर यकीन ही नही हो रहा था की ये वही है।
फिर तो वक़्त ने मुझे भी बदला होगा। 
काश,
हम इंसान समझ पाते उसकी दुनिया को।
 

गुरुवार, 20 सितंबर 2012

ये लहरें, ये हवाएं , ये चांदनी 

जिसके हिस्से में ये जवानी है   

ये मुहब्बत उसकी इबादत है 

हर एक शय में जिसकी मेहरबानी  है 



मंगलवार, 18 सितंबर 2012

कल रात ज़िन्दगी से भी रहा नहीं गया 
अलग होके मुझसे लगी सवाल करने 
पूछा , इस कदर टूट कर 
कब तक चाहोगे उसे ?
कहा  मैंने भी
कि  बता मुझको 
सिवा चाहत के और क्या 
सिखाया है मुझे तुमने 

कहा उसने की आखिर ऐसा खास क्या उसमें 
इतने बड़े जहां में है वो आम सी लड़की ?
कहा मैंने  कि , बस एक पल के लिए 
मेरी आँखों से उसको देख लो तुम 
दुबारा तुम ना  पूछोगी 
कि इतनी दीवानगी क्यूँ है 

ये रास्ता है तबाही का 
मै कब तक साथ दूँ तेरा 


















 




कहा , मुहब्बत मोम का घर है 






























मत कर तबाह मुझको 
किसी गैर के लिये ...

सोमवार, 17 सितंबर 2012

कभी रस्ते में मिल जाओ
तो कतरा के गुजर जाना 
हमें इस तरह तकना 
जैसे पहचाना नही तुमने 

हमारा जिक्र जब आये 
तो यूँ अनजान बन जाना 
कि जैसे नाम सुनकर भी 
हमें जाना नहीं तुमने ......
कल नयी कोंपलें फूटेंगी,
कल नये फूल मुस्काएयेंगें,
और नई घास के नये फर्श पर
नये पांव इठलायेंगें ......

वो मेरे बीच नहीं आये
मै  उनके बीच में क्यूँ आऊं
उनकी सुबह और शामों का
मै एक भी लम्हा क्यूँ पाऊं

मै पल दो पल का शायर हूँ,
पल दो पल मेरी कहानी है
पल दो पल मेरी हस्ती है
पल दो पल मेरी कहानी है ...........

  

मंगलवार, 4 सितंबर 2012

शिक्षक दिवस पे उन सभी जाने अनजाने गुरुओं का आभार जिनसे जीवन में विविध रंग देखने को मिला। इस सूची में स्कूल,कॉलेज के शिक्षक , मित्र, मार्गदर्शक , शुभचिंतक, आलोचक से लेकर विपदा , मुहब्बत और तमाम परिस्थितियों का विनम्र आभार जिनसे हंसाने , रोने और मुस्कुराने का आत्म-बल मिला। ~विनीत 

रविवार, 27 मई 2012

बादल  क्यों बरसता है ...

सावन के मौसम में हम अक्सर बारिश की फुहारों का मजा लेना चाहते हैं। प्रकृति का पूरा सौन्दर्य काली घटाओं के बिना अधुरा सा लगने लगता है। सदियों से बादल  धरती की प्यास बुझाते रहे हैं. हमारे धर्म-ग्रंथों से लेकर आज तक के लोक जीवन में सावन का अपना विशेष महत्व है . पर कभी आपने सोचा की ये बदल बनते कैसे हैं और बारिश होती क्यों है?

पहले ये बताता हूँ कि  बादल  बनते कैसे हैं? समुद्र, झील, तालाब और नदियों का पानी सूरज की गर्मी से वाष्प बनकर ऊपर उठता है। इस वाष्प से बादल बनते हैं। बादल पानी या बर्फ़ के हज़ारों नन्हें नन्हें कणों से मिलकर बनते हैं। ये नन्हें कण इतने हल्के होते हैं कि वे हवा में आसानी से उड़ने लगते हैं।बादल के तीन प्रमुख प्रकार होते हैं— सिरस, क्युमुलस और स्ट्रेटस। इन नामों को बादलों की प्रकृति और आकार के आधार पर रखा गया है। 


ऊँचाई पर उड़ने वाले सबसे सामान्य बादल सिरस कहलाते हैं। सिरस का अर्थ है गोलाकार। इन्हें लगभग रोज़ आसमान में देखा जा सकता है।
क्युमुलस का अर्थ है ढेर। अपने नाम के अनुरूप ये बादल रूई के ढेर की तरह दिखाई देते हैं। कभी कभी ये गहरे रंग के होते हैं तब इनमें से पानी या ओलों की वर्षा हो सकती है। ऐसे बादलों को क्युमुलोनिंबस कहते हैं। क्युमुलोनिंबस बादल एवरेस्ट पर्वत से दुगुने ऊँचे हो सकते हैं और अकसर उनमें आधा करोड़ टन से ज्यादा पानी होता है। लैटिन भाषा में क्युमुलोनिंबस का अर्थ है पानी से भरा हुआ बादल.
स्ट्रेटस का अर्थ है फैला हुआ। अपने नाम के अनुरूप ये बादल काफ़ी नीचे होते है और पूरे आकाश को घेर लेते है। जब ऐसे बादल वर्षा करते हैं तो उन्हें निंबोस्ट्रेटस कहते हैं।

बहुत बार बादल मिलेजुले आकार-प्रकार के भी होते हैं। ऐसे बादलों को मिलेजुले नामों से जाना जाता है।


अब ये तो पता चल गया की बदल बनते कैसे हैं। यह ये जानना जरूरी है कि हम जैसे जैसे धरती से ऊपर जाते हैं तापमान कम होने लगता है। बदल का बारिश की बूंदों में बदलना सिर्फ कम तापमान के कारण ही होता है।ऊपर की हवा ठंडी होती है।ये बादल जब ठंडी हवा से टकराते हैं तो इनमें रहने वाले वाष्प के कण पानी की बूँद बन जाते हैं। ठीक वैसे ही जैसे कमरे की हवा में रहने वाली वाष्प फ्रिज से निकाले गए ठंडे के कैन से टकरा कर पानी की बूँद बन जाती है।

बूँदों वाले बादल भारी होकर धरती के पास आ जाते हैं। बूँदें धरती की आकर्षण शक्ति से खिंचकर वर्षा के रूप में बरस जाती हैं। इस प्रकार धरती से बादल और बादल से धरती तक यात्रा करता हुआ पानी सदा गतिमान रहता है।












शनिवार, 18 फ़रवरी 2012

हर सपने का आधार रहे हो,
पल पल मेरे साथ रहे हो
जीवन दर्शन गणित आराधना
हर नैया के  खेवनहार रहे हो.... ...

सूखी फसलों के ख्वाब के जैसे
जीवन की हरियाली हो
मन के घोर  अंधेरों की आशा
बिना दीप दीवाली हो


हर जीत के नश्वर जग में
चाँद सितारों तक समझाया
प्यार मोह की अनुभूति कराकर
मुझको मुझसे है मिलवाया


झूठी दुनिया के एस किस्से को
मई स्वीकार करूँ कैसे?
इतना सारा कर्ज है तेरा
मई व्यापार करूं कैसे??..............विनीत 

रविवार, 5 फ़रवरी 2012

सरहद 
इंसानों के लिए है,

सोचो.........
तुमने और मैंने
क्या पाया 
इंसा हो के..????

पंछी ..... नदिया.......पवन के झोंके..!!!

रविवार, 29 जनवरी 2012



बड़े अरमान से सज संवर के घर से निकले होंगे,

मुझे पता है उस महफ़िल में तेरे ही जलवे होंगे....

औरों के संग तुम झूमोगे- गाओगे भी 

मगर तुम्हारे अन्दर ही खुद से  कुछ शिकवे भी होंगे..

शनिवार, 28 जनवरी 2012

कोई अपने घर में है, कोई जाग रहा है रातों में...

चुप सा घर की बातें सुनता, कोई चीख रहा सन्नाटों में..

उसकी बोली सुनने की 
आदत जब चिल्लाती है..
कहीं रूठ न जाये वो 
मोबाईल हाथों से गिर जाती है..

उसकी करवट, उसकी नीदें 
उसके सपने बाहों में...
कोई चुप सा घर में है
कोई चीख रहा सन्नाटों में....

जिसकी बस एक आहट से
दिल में लहरें तूफानी हों..
रेत,समंदर, पुरवाई हो
धड़कन जिसकी दीवानी हो ..

हो बसंती मन का मौसम ,  दीप जले जज्बातों में,

कोई अपने घर में है, कोई जाग रहा है रातों में....... "विनीत" 

रविवार, 1 जनवरी 2012

"कैसा रहेगा ये साल , मुझे मालूम नहीं लेकिन,
पहले दिन ने ही है झकझोरा जमकर...
वो आवाज जिससे साल की शुरुआत हुई
गूंजेगी जिन्दगी भर हमसफ़र बनकर....!!!