मंगलवार, 25 जून 2013

  ये  कसक है -- तन्हाई  और सूनेपन के बीच की  .... इसे बस इतना पता है कि कुछ हो रहा है ..पता नहीं कहाँ ... क्या ..... अच्छा या बुरा .... कुछ  पता नहीं ...घर का आँगन, कालेज की कैंटीन , ऑफिस की पार्किंग .. बिल्डिंग का पार्क .. कहीं से कोई सुराग नही .
बस यही महसूस हो रहा है कि इस समय "कहीं और" होना चाहिए था .

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