मंगलवार, 25 जून 2013

तुम्हारी क्यूँ न तकूँ  मैं राह

बांह छांह

छाये रे भ्हाये रे ललचाये रे




आते -जाते , मिलते- बिछुरते , तू है मुझको भाये रे
सीधा सादा सरल सलोना , तू रोज संवरता जाये रे



प्यारी प्यारी पलकें तेरी  ,जिनकी शीतल छांव

तुम्हारी क्यूँ न तकूँ  मैं राह
http://www.youtube.com/watch?v=qnE7N6prtdM

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