रविवार, 9 जून 2013

जब कभी
ख्वाहिशों की लहरें 
यादों में मचलती हुइ 
तन्हाई से टकराती है
तो 
इरादों की  रेत पर
बिखर  जातीं  हैं 

रेत की 
इसी नमीं से 
अब तक 
वो सपना जिंदा है 
जिसे 
तुमने अपने अधरों से 
सींचा था कभी 








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