जब कभी
ख्वाहिशों की लहरें
यादों में मचलती हुइ
तन्हाई से टकराती है
तो
इरादों की रेत पर
बिखर जातीं हैं
रेत की
इसी नमीं से
अब तक
वो सपना जिंदा है
जिसे
तुमने अपने अधरों से
सींचा था कभी
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